भारत की जनगणना 2027: घर-घर विकास की मजबूत नींव
Indian Census 2027: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और यहाँ की जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि हर नागरिक की पहचान, अधिकार और भविष्य की योजना का आधार होती है।
भारत की जनगणना 2027 इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो देश के सामाजिक, आर्थिक और आवासीय ढांचे को समझने में मदद करेगी। Indian Census 2027
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 11,718.24 करोड़ रुपये की लागत से भारत की जनगणना 2027 कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है ।

इस जनगणना का चरण-1 विशेष रूप से मकान सूचीकरण एवं आवास गणना पर केंद्रित है।
चरण-1: मकान सूचीकरण एवं आवास गणना क्या है?
मकान सूचीकरण का अर्थ है —
देश के हर गाँव, कस्बे और शहर में प्रत्येक मकान की पहचान, स्थिति और उपयोग का विवरण एकत्र करना।
इसमें यह जानकारी जुटाई जाती है कि:
- मकान पक्का है या कच्चा
- मकान में कितने परिवार रहते हैं
- आवासीय, व्यावसायिक या मिश्रित उपयोग
- पानी, बिजली, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ
- मकान की भौगोलिक स्थिति
👉 यह जानकारी सरकार को योजनाएँ सही लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। Indian Census 2027
🗓️ मकान सूचीकरण कार्यक्रम की अवधि
📅 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक
यह कार्यक्रम पूरे देश में अलग-अलग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में निर्धारित 30 दिनों की अवधि में संचालित किया जाएगा। Indian Census 2027
हर राज्य अपनी अधिसूचना के अनुसार इसका संचालन करेगा।
🏡 स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा
जनगणना 2027 में एक बड़ा और आधुनिक बदलाव किया गया है — स्व-गणना की सुविधा।
✨ स्व-गणना क्या है?
- नागरिक स्वयं अपने घर की जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे
- यह सुविधा घर-घर गणना शुरू होने से 15 दिन पहले तक उपलब्ध रहेगी
इसके लाभ:
- समय की बचत
- जानकारी में अधिक सटीकता
- नागरिकों की भागीदारी
- डिजिटल इंडिया को बढ़ावा
भारत की जनगणना 2027: पहला चरण – मकान सूचीकरण और आवास गणना की पूरी जानकारी
भारत सरकार ने बहुप्रतीक्षित भारत की जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम जानकारी के अनुसार, जनगणना का पहला महत्वपूर्ण चरण, जिसे ‘मकान सूचीकरण एवं आवास गणना’ (House Listing and Housing Census) कहा जाता है, 2026 में आयोजित किया जाएगा। यह डेटा संग्रह का एक विशाल और महत्वपूर्ण अभ्यास है जो देश के भविष्य की योजनाओं की नींव रखेगा।
आइए, इस पहले चरण के बारे में विस्तार से जानते हैं:
चरण I: मकान सूचीकरण एवं आवास गणना
जनगणना का पहला चरण देश भर में सभी इमारतों, मकानों और घरों की एक व्यापक सूची तैयार करने पर केंद्रित है। इस प्रक्रिया में न केवल घरों की गिनती की जाएगी, बल्कि उनकी स्थिति, उनमें उपलब्ध सुविधाओं और वहां रहने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी एकत्र की जाएगी। यह डेटा आवास, पानी, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचागत योजनाओं के लिए जनगणना महत्वपूर्ण है।
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महत्वपूर्ण तिथियां और कार्यक्रम
- समग्र समय-सीमा: मकान सूचीकरण का यह व्यापक कार्यक्रम 1 अप्रैल 2026 से 30 सितम्बर 2026 के बीच चलेगा।
- क्षेत्रीय संचालन: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हालांकि समग्र समय-सीमा छह महीने की है, लेकिन प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में वास्तविक जमीनी स्तर पर काम एक विशिष्ट 30 दिन की अवधि के दौरान ही संचालित किया जाएगा। यह 30 दिन की अवधि प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय और अधिसूचित की जाएगी।
एक नई पहल: स्व-गणना (Self-Enumeration)
डिजिटल इंडिया की भावना को आगे बढ़ाते हुए, जनगणना 2027 में एक बड़ी नई सुविधा पेश की गई है – ‘स्व-गणना’।
- यह क्या है?: इस सुविधा के तहत, नागरिक अपने परिवार और घर का विवरण स्वयं ऑनलाइन भर सकेंगे।
- समय-सीमा: यह व्यवस्था आपके क्षेत्र में घर-घर जाकर होने वाले मकान सूचीकरण के शुरू होने से 15 दिन पहले तक उपलब्ध रहेगी।
- लाभ: यह न केवल नागरिकों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि डेटा की सटीकता को भी बढ़ाएगा। जो लोग तकनीक-प्रेमी हैं, वे इस विकल्प का लाभ उठा सकते हैं और गणनाकारों के आने से पहले ही अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण नोट: कृपया ध्यान दें कि उपरोक्त सभी कार्यक्रम और तिथियां प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा अधिसूचित अंतिम कार्यक्रम के अधीन हैं। अपने क्षेत्र की सटीक तारीखों के लिए स्थानीय सरकारी घोषणाओं पर नज़र रखें।
(स्रोत: भारत की जनगणना 2027, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार)
जनगणना और मानवता का संबंध
जनगणना केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मानव गरिमा और समान अधिकार का प्रतीक है।
जब हर व्यक्ति की सही गिनती होती है, तभी:
- गरीब को उसका हक मिलता है
- बुजुर्गों को पेंशन
- बच्चों को शिक्षा सुविधाएँ
- महिलाओं को सुरक्षा और योजनाएँ
- ग्रामीण भारत को विकास
👉 एक भी व्यक्ति छूट जाए, तो विकास अधूरा रह जाता है।
जनगणना क्यों है ज़रूरी?
जनगणना के आँकड़ों से ही तय होता है:
- स्कूल, अस्पताल और सड़कें कहाँ बनें
- कितने घरों को आवास योजना मिले
- राशन, बिजली, पानी की योजना
- आपदा प्रबंधन और राहत कार्य
सही जनगणना = सही विकास
📢 नागरिकों से अपील
सरकार द्वारा नियुक्त गणना कर्मियों को सही और पूरी जानकारी दें।
यदि आप स्व-गणना कर रहे हैं, तो जानकारी ईमानदारी और जिम्मेदारी से भरें।
याद रखें:
जनगणना में आपकी एक जानकारी, देश के करोड़ों लोगों के भविष्य को दिशा देती है।
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लगभग 30 लाख कर्मी करेंगे कार्य
इस विशाल अभियान को पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड कर्मियों को तैनात किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
🔹 एन्यूमेरेटर
🔹 सुपरवाइज़र
🔹 मास्टर ट्रेनर
🔹 प्रभारी अधिकारी
🔹 जिला और राज्य स्तरीय अधिकारी
ये सभी जनगणना को सफल बनाने में भूमिका निभाएंगे।
उनके कार्य के लिए छात्रों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
जातिगत और विस्तृत आंकड़ों का संग्रह
2027 की जनगणना में जाति डेटा भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से शामिल किया जाएगा। इससे समाज के विभिन्न वर्गों, समुदायों और समूहों की स्थिति बेहतर समझ में आएगी।
इन आंकड़ों से नीति निर्माण में गति आएगी और सामाजिक योजनाएँ और अधिक प्रभावी बनाई जा सकेंगी।

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